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गज़ल

अदल बातों को कहकर झूठ टाला जा रहा है
अदालत में भी अब सिक्का उछाला जा रहा है

तशद्दुद इंतिहा तक के लिए होनी थी लेकिन
इसे अब इब्तिदा पर ही सँभाला जा रहा है

करें हम किस तरह ताबीर तय ख़्वाबों की अपने
मुनासिब हल अभी इसका निकाला जा रहा है

तुम्हें ये ज़ुल्म करके क्या मिला ख़ारों बताओ
रुला कर पाँव को हर एक छाला जा रहा है

किसी मैकश को लगता है कभी क्या मैकदे में
ख़ुद उसके बाल बच्चों का निवाला जा रहा है

भुलाने में हुए नाकाम तो एलबम से मेरी
हर इक तस्वीर को बाहर निकाला जा रहा है

समझने को जमाने के चलन का हर सलीक़ा
अँधेरे की परस्तिश को उजाला जा रहा है

अदल तर्कसंगत



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