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चौपाल / चुनिंदा अशआर

ग़ज़ल

गोरे  हैं  वो  काले  भी  हैं,  हैरत है !
दो  किरदार सँभाले भी हैं,  हैरत है!

शाम सवेरे जो हँस-हँस के मिलते हैं
मैल  दिलों  में  पाले भी हैं,  हैरत है!

इज़्ज़त घट जाती  है इज़्ज़त देने से
ऐसा  कहने  वाले  भी   हैं,  हैरत है!

मौक़ा  देख पड़ौसी से मिल जाते हैं
कुछ  ऐसे  घरवाले  भी  हैं,  हैरत है!

सच्चाई  की  चाह उन्हें भी है लेकिन
मुँह पर  मोटे  ताले  भी  हैं,  हैरत है!

कहने  भर  को त्यागी हैं, सन्यासी हैं
लेकिन तख़्त सँभाले भी हैं,  हैरत है!

मंज़िल पर जो सबसे पहले पहुँचे थे
उन  पैरों   में  छाले  भी  हैं,  हैरत है!

भरत दीप

 

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Replies

  • बहुत खूब .... वाहहहह
    • बहुत शुक्रिया आपका मोहतरम ।
  • Waah waah kya baat hai
    • बहुत शुक्रिया आपका आदरणीया
  • Waah waah Bharat ji. Badhiya ghazal.
    • बहुत मुहब्बत आपकी आदरणीय
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