------ चौपाल ------


आप साहित्य से सम्बंधित कोई भी प्रश्न यहाँ पूछ सकते हैं।।

यदि चाहें तो इस्लाह के लिए एक ग़ज़ल चौपाल में पोस्ट करें।

आप अपने चुनिंदा अशआर भी एक साथ पोस्ट कर सकते हैं।

टेक्स्ट बॉक्स के नीचे दी गयी किसी एक कैटेगरी को चुनना अनिवार्य है।


चौपाल

1. इज़ाफ़त का प्रयोग दो भाषा के शब्द (जैसे अरबी के साथ फ़ारसी शब्द "शौक़-ए-ज़िंदगी" ) को मिलाकर किया जा सकता है क्या ?

2. बे ईमानी  को  2122 लिया जा सकता है क्या ?

3.  नज़र-ए-शौक़  का मात्रा भार क्या होगा ?

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Replies

  • जिस ज़बान में शायरी कर रहे हैं, तरकीब भी उसी ज़बान की लगा सकते हैं क्योंकि हम उर्दू में शायरी कर रहे हैं अरबी में नही, इस एतेबार से शौके-ज़िन्दगी दुरुस्त। अगर इसके अनुपालन में सख़्ती बरती जाय तो 80-90℅ उर्दू शायरी ख़त्म हो जाएगी।
    बे-ईमानी को यदि 2122 पर लेंगे तो ये बेइमानी बनेगा और ऐसे में अलिफ़ के बाद ईमानी की इये अदा नहीं होगी।
    नज़रे-शौक़ या नज़्र-ए-शौक़।
    नज़रे-शौक़=112-21(शौक़ की नज़र)
    नज़्र-ए-शौक़=21-21, 22-21(शौक़ को समर्पित)
    • बहुत शुक्रिया जनाब ,,,
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