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चुनिंदा अशआर

तू जो चल मेरे मुताबिक,तेरी ज़िंदगी बना दूँ
तू है पैकरे अदावत, तुझे प्यार मैं सिखा दूँ

मेरी रूह की जगह अब तेरी याद बस गयी है
यही लाज़िमी है आ जा, तुझे भी वहीं बसा दूँ

लगती नहीं हैं तुझको, जो हमारी बददुआएँ
तू बने हमारा दुश्मन , ये दुआ सी बद्दुआ दूँ

तेरे दिल में जो ख़लिश है उसे उस्तुवार रखना
कहीं ये न हो कि उसका मैं वज़ूद ही मिटा दूँ

तू ने ज़ुल्फ़ क्या सँवारी, हुए ख़म शरीर यकजा
न हो और कोई चारा, तो मैं उँगलियाँ फिरा दूँ

ये जदीद इम्तिहां है मेरे ज़ब्त और गुमां का
तू कहे तो मैं नतीजा अभी हार कर सुना दूँ

अभी कोह में निहाँ है जो समुंदर आँसुओं का
उसे आबशार कर के कहो आँखों से बहा दूँ

 

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Replies

  • Ye dua si bad'dua dooN......waaah
    • धन्यवाद अंकुर जी
  • लाजवाब ग़ज़ल
    • शुक्रिया मीना जी
  • बेहतरीन है अल्फ़ाज़ से परे
    • शुक्रिया उर्मिला जी
  • वाह उम्दा ग़ज़ल
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