दी गयी बह्र पर ग़ज़ल या अशआर कहें।

आज की बह्र

221 2122 / 221 2122

मफ़ऊलु फ़ाईलातुन / मफ़ऊलु फ़ाईलातुन

शिकस्ते नरवा का ख़याल रखें

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ग़ज़ल - आशुतोष तिवारी

221 2122 221 2122

एक बार मर के देखा, सचमुच ही मर गए थे
उस दिन के बाद तौबा, मरने से कर गए थे

जाने ये क्यों कहा तुम लड़ना हमारी ख़ातिर
माफ़ी हो बेख़ुदी में हद से गुज़र गए थे

सिग्नल पे गाड़ियों…

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0 Replies · Reply by SD TIWARI Aug 15

ग़ज़ल

गज़ल

एक चाँद कभी शब भर , जब तारों पे हँसता है।
मंज़र मेरे माजी़ का , अन्ध्यारों पे हँसता है।

 

वो शख़्स न जानेगा , उल्फ़त के सलीके़ को।
भड़का के जो शोलों को , अंगारों पे हँसता…

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ग़ज़ल

ग़ज़ल

माथे पे सजाया जब , हम ने मह-ए-कामिल को।
तारीकी ने ढक डाला, हर तारे की झिलमिल को।।


ता उम्र सफ़र करना, किस्मत में रहा उनकी।
जो ढूँढते फिरते थे , हर राह में मंजिल को।।…


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7 Replies · Reply by Reshma zaidi Aug 15

सितम के  तीर   चलाकर वो मिरा यार गया

सितम के  तीर   चलाकर वो मिरा यार गया
फरेब   जीत   गया  ,   ऐतबार   हार   गया
अब आप करते हो  परछाईयो  पे  बमबारी…

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दी गयी बह्र में ग़ज़ल

ग़ज़ल

221  1222  221  1222

फ़ेहरिस्त तमन्नाओं की जब भी बनाना तुम

कागज़ में जगह कम है ये भूल न जाना तुम

 

कुछ ख़्वाब तुम्हारे भी रहने हैं अधूरे ही

मायूस मगर होकर दिल को न…

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1 Reply · Reply by SD TIWARI Jul 27

दी गई बहर पर ग़ज़ल

 

*मैं पूछुं ख़ुदा से ये ,गर मुझको नज़र आए
तन्हाई में जीने क्यूं , धरती पे बशर आए ...


*अश्कों से भरी आंखें बेताब छलकने को
दास्तां न ये कह बैठें बदनामी न घर आए..


*अरमान मुहब्बत का तुझसे है मेरे हमदम…

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0 Replies · Reply by Amod shrivastava Jul 25

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