हर सोमवार को आप अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट करें।

टेक्स्ट बॉक्स के नीचे दी गयी किसी एक कैटेगरी को चुनना अनिवार्य है।

ग़ज़ल पूर्व प्रकाशित नहीं होनी चाहिए।


ग़ज़ल .... प्लस(+) के निशान पर क्लिक करके पोस्ट करें

All Discussions (81)

Sort by

सोमवार की ग़ज़ल

 

जमीं पे चलती हूँ मैं बाल-ओ-पर नहीं रखती
इसी लिए मैं फ़लक पर नज़र नहीं रखती

झुकूँ मैं सिर्फ़ ख़ुदा के ही आस्ताने पर
किसी वज़ीर के क़दमों मेंं सर नहीं रखती

यकीन है़ मुझे मजबूत अपने हाथों पर
मैं चापलूसी का कोई…

Read more…
7 Replies · Reply by Mrs. RAJESH KUMARI yesterday

ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब जब भी मैं अपनी जिद पर  आता हूँ 

हर तूफां को घुटनों के बल लाता हूँ 

 

सूखी धरती सपने में आकर बोली 

कर्ज़  चुका  मेरा,  मैं तेरी माता हूँ 

 

दूर  रहा  करता हूँ नफ़रत वालों से 

मैं बस उल्फ़त के…

Read more…
3 Replies · Reply by Babu Gautam on Tuesday

ग़ज़ल

 ग़ज़ल

एक पैकर सा, हक़ीक़त है कि धोका क्या है।
मेरी आँखों ने अजब ख़्वाब ये देखा क्या है।।

 

उम्र भर चलते रहे उसको समझ कर मंज़िल।
फ़िर भी मंज़िल न मिली जाने ये रस्ता क्या.है।।

 

ज़ेह् न और दिल का निपटता ही…

Read more…
7 Replies · Reply by Dr.meena naqvi on Monday

ग़ज़ल

ग़ज़ल 

जैसे हो आफ़ताब घटा की चपेट में 

यूँ आ गया चराग़ हवा की चपेट में

 

दुनिया में लाइलाज है बस इश्क़ का मरज़

आता नहीं मरज़ ये दवा की चपेट में

 

जिसके गुनाह बढ़ते ही जाते हैं रात दिन 

वो आयेगा ज़रूर…

Read more…
8 Replies · Reply by Naaz Pratapgarhi on Monday

सोमवार की ग़ज़ल

ग़ज़ल

लगती है ज़ीस्त मौत का सामाँ कभी-कभी ।
गुज़रे है ऐसे दौर से इन्साँ कभी-कभी ।

'मचलें हैं जान देने के अरमाँ कभी-कभी ।'
होते हैं ज़िन्दगी में यूँ इम्काँ कभी-कभी ।

यूँ तो नहीं है सह्ल मगर तू जो साथ है ,
लगती है…

Read more…
0 Replies

ग़ज़ल

एक ताजा ग़ज़ल...
 
आइना दर आइना तस्वीर हो जाएंगे हम
जब किसी की आंख की तनवीर हो जाएंगे हम
 
अपने सारे दुख कभी हमसे भी कहकर देखना
कुछ न हो पाए भी तो अकसीर हो जाएंगे…

Read more…
1 Reply · Reply by Rakesh Tyagi on Monday

प्रयागराज - लखनऊ - कानपुर - नोएडा - नई दिल्ली - चंदौसी - मेरठ - साँईखेड़ा - इंदौर - भोपाल - जयपुर - आगरा