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All Discussions (62)

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पावस के गीत

*पावस के गीत*

बारिशों के दिन सुहाने आ गये अब
बात मैं करती रही.. वो हँस रहे हैं
ढक लिये हैं बदलियों की धुंध सूरज
और मैं उकता रही.. वो हँस रहे हैं ।

दिल्लगी दिल पर लगा बैठी तभी तो
नासमझ सी बात अब कहने लगी हूँ…

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तामरस छंद

तामरस छंद

प्रिय प्रभु से चुपके मिल आयी ,
सखि संग सौतन डाह निभायी ।

चितवन चंचल और हुई है,
मृगनयनी चितचोर हुई है ।
बतरस के लहजे सब चोखे ,
सब सखियों को देकर धोखे ।
कब वृषभानु लली मिल आयी,
सखि सब रूठ गयी…

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2 Replies · Reply by Geeta vishwakarma Aug 14

गीत

गीत

उपवन में खिलते हैं नित नित, कितने सुन्दर फूल l
क्यूँ माली के हिस्से आए, अब तक केवल शूल ll

वैसे काँटों को माली ने
फूलों सा ही प्यार दिया
इसीलिए शायद कुदरत ने
काँटों का ही हार दिया

सोच रहा वो खड़ा…

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मुखड़ा और दो अन्तरे

परीक्षा तो परीक्षा है अब वो चाहे जीवन की हो या पी.एच.डी.की प्रवेश परीक्षा हो...

जो मिली गुरु से तुम्हारे,क्या वो दीक्षा छोड़ दोगे??
क्या किसी परिणाम के भय से परीक्षा छोड़ दोगे??

है समर जीवन भयंकर,साथ कंटक पथ निरंतर,
किन्तु…

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गीतिका

ये छल प्रपंचों भरा है जीवन परन्तु तुम इससे डर न जाना।
करे समर्थन नहीं हृदय तो कभी भी तुम उस डगर न जाना।

सुखद सुगंधित हवाएं हैं तो भरा भी है पथ ये कंटकों से,
जो हो गए पाँव रक्त रंजित सुनो कहीं तुम ठहर न जाना।

चरित्र…

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4 Replies · Reply by Manjul Mayank Mishra 'Manzar' Aug 12

गीतिका

दोह-गीतिका

जाना पहचाना मिला रस्ते में अनजान।
मन में इक विश्वास था वो लेगा पहचान।।

 

प्रेम-सुधा है शून्य से अब तक अंगीकार।
बस सपनों मे ही मिला उस से मुझ को मान।।

 

मिले आप अपनत्व से, ये मन हुआ अधीर।…

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8 Replies · Reply by Dr.meena naqvi Aug 8

गीत


"आसमाँ के वक्ष पर हम दस्तख़त करने चले हैं।

थे कुहासे, धूल-धक्कड़,
आग के गोले प्रबल थे,
किंतु अपने हौसले भी,
वज्र के जैसे सबल थे,
आँधियों ने राह रोकी,
सूर्य ने भी ताप डाला,
हम हठी थे, चाँद, मंगल,…

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2 Replies · Reply by Ritu kaushik Aug 8

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