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All Discussions (62)

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दिये गये काफि़ये पर ग़ज़ल

ग़ज़ल

वफा़ओं का मेरी पलको पे रतजगा होगा।
ख़बर न थी, यूँ मुहब्बत का सिलसिला
होगा।।


चले थे इसलिये हम अज़्म की पनाहों में।
पता था हम को कि पथरीला रास्ता होगा।।


नदी चटानों से टकरा के हँसती रहती है।…

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10 Replies · Reply by Dr.meena naqvi Aug 14

ग़ज़ल 2122 2122 2122 212

धूप में जैसे कुहासा इक तसव्वुर आपका
है हसीं झोंका हवा का इक तसव्वुर आपका

ज़ेहन में आ कर कहीं से गुदगुदाने लग गया
देख कर मुझको रुआँसा इक तसव्वुर आपका

सीढ़ियाँ कितनी भी चढ़ लूँ भूल जाने की भले
साँप है…

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2 Replies · Reply by Dinesh Kumar Drouna Aug 14

ग़ज़ल

तू मुहब्बत में कभी रोया नहीं,
तूने शायद आईना देखा नहीं,

वक़्त के चेहरे की देखीं झुर्रियां,
क्या दरूँ था ये कभी सोचा नहीं,

उम्र भर तड़पे ये तनहा ज़िन्दगी,
तूने शायद ऐसा कुछ खोया नहीं....

दास्तां कहता है आधी रात की,…

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2 Replies · Reply by SD TIWARI Aug 13

दिए गए क़ाफिये पर ग़ज़ल

ग़ज़ल

मेरी वफ़ा का मुझको ही मिलता सिला नहीं ।
मेरा वुजूद क्या है ये मुझको पता नहीं ।

क्यूँ उसकी फ़ितरतों में ज़रा भी वफ़ा नहीं ।
क्या उसके इस गुनाह की कोई सज़ा नहीं ।

करते है सब ही इश्क़ मगर सबको है पता ,
ये वो…

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2 Replies · Reply by Rakesh Tyagi Aug 13

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मिजा़ज अपने कहाँ आज हैं ठिकाने पर।
हुजू़र आये हैं मेरे ग़रीबखा़ने पर।।


पिघल रही है मुसलसल जो बर्फ़ आँखों से।
अजीब धूप है पलकों के शामियाने पर।।


न जाने आ गये क्यों उस की आँख में आँसू।
जो हँस…

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2 Replies · Reply by Dr.meena naqvi Aug 6

दिए गए क़ाफिये पर ग़ज़ल

ग़ज़ल
2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी में ऐसा कितनी बार होता है यहाँ
मंज़िलों का रास्ता दुश्वार होता है यहाँ

जो सफर के लुत्फ का अँदाज़ कर सकता…

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1 Reply · Reply by Vineet Aashna Jul 30

लड़ना झगड़ना है


जहाँ भर से किसी बेज़ार का लड़ना झगड़ना है
मुहब्बत बस यही हर बार का लड़ना झगड़ना है

तुम्हें लगता है क्यों बेकार का लड़ना झगड़ना है
हुदूद ए इश्क़ तो बस यार का लड़ना झगड़ना है

उसे देखा तो कितने ख़्वाब…

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2 Replies · Reply by Vineet Aashna Jul 30

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