दिए गए काफ़िये पर अशआर या पूरी ग़ज़ल कहें।

गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें।

आज के लिए क़ाफ़िया अलिफ़ "आ" की क़ैद वाले।

अगर हे के क़वाफ़ी लें तो मतले में उसका प्राविधान कर लें।

बह्र और रदीफ़ आप ख़ुद चुनें।

अगले प्रोग्राम की घोषणा होने तक आप इस क़ाफ़िये पर पोस्ट कर सकते हैं। टेक्स्ट बॉक्स के नीचे कैटेगरी चुनना अनिवार्य है।


दिए गए क़ाफ़िये पर .... प्लस(+) के निशान पर क्लिक करके पोस्ट करें

धूप में जैसे कुहासा इक तसव्वुर आपका
है हसीं झोंका हवा का इक तसव्वुर आपका

ज़ेहन में आ कर कहीं से गुदगुदाने लग गया
देख कर मुझको रुआँसा इक तसव्वुर आपका

सीढ़ियाँ कितनी भी चढ़ लूँ भूल जाने की भले
साँप है निन्यानवे का इक तसव्वुर आपका

ये नहीं हो तो ख़लिश है और हो तो भी ख़लिश
दर्द है लेकिन दवा सा इक तसव्वुर आपका

रात दिन पीछे लगा रहता है साया सा मिरे
बेतहाशा बदहवासा इक तसव्वुर आपका

गो हक़ीक़त ख़्वाहिशों पर मुँह चिढ़ाती है मगर
है हक़ीक़त पर तमाचा इक तसव्वुर आपका

----द्रौण 

You need to be a member of Sukhanvar International to add comments!

Join Sukhanvar International

Email me when people reply –

Replies

This reply was deleted.

प्रयागराज - लखनऊ - कानपुर - नोएडा - नई दिल्ली - चंदौसी - मेरठ - साँईखेड़ा - इंदौर - भोपाल - जयपुर - आगरा