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ग़ज़ल

वफा़ओं का मेरी पलको पे रतजगा होगा।
ख़बर न थी, यूँ मुहब्बत का सिलसिला
होगा।।


चले थे इसलिये हम अज़्म की पनाहों में।
पता था हम को कि पथरीला रास्ता होगा।।


नदी चटानों से टकरा के हँसती रहती है।
कि उसका जल्द समन्दर से राब्ता होगा।।

 

सुलगती धूप का सूरज रहेगा मेरे नाम ।
तुम्हारे हिस्से में साये का मशग़ला होगा।।


कभी ये बस्ती मेरे नाम से ही थी मंसूब।
जरूर नाम तो तुमने मेरा सुना होगा।।


यकी़न है मुझे तन्हाई के सफ़र में भी।
तेरी दुआ का मेरे साथ का़फि़ला होगा।।


ये मेरा दिल , जो खिला मिस्ल फू़ल के 'मीना'।
हवा ने चुपके से कुछ कान में कहा होगा।।

मीना नक़वी

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Replies

  • Bahot umda
  • बहुत उम्दा ग़ज़ल
    • बहुत शुक्रिया।
  • बहुत ख़ूब क्या कहने मोहतरमा ....उम्दा ग़ज़ल हुई है
    • बहुत बहुत शुक्रिया
  • Zindabad zindabad
    Lajwab ghazal.
    • सादर आभार ।
  • Khubsurat Ghazal, daad hi daad hai.
    • दिल से ममनून हूँ, मोहतरम ।
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